Firaq Gorakhpuri – Jo Baat Hai Hadd Se Badh Gayi Hai | फ़िराक़ गोरखपुरी – जो बात है हद से बढ़ गयी है | Ghazal

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Firaq Gorakhpuri - Jo Baat Hai Hadd Se Badh Gayi Hai

जो बात है हद से बढ़ गयी है
वाएज़(1) के भी कितनी चढ़ गई है

हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी
दबने से कुछ और बढ़ गई है

हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक(2)
बर्गे-गुले-तर से बढ़ गयी है

जब-जब वो नज़र उठी मेरे सर
लाखों इल्ज़ाम मढ़ गयी है

तुझ पर जो पड़ी है इत्तफ़ाक़न
हर आँख दुरूद(3) पढ़ गयी है

सुनते हैं कि पेंचो-ख़म(4) निकल कर
उस ज़ुल्फ़ की रात बढ़ गयी है

जब-जब आया है नाम मेरा
उसकी तेवरी-सी चढ़ गयी है

अब मुफ़्त न देंगे दिल हम अपना
हर चीज़ की क़द्र बढ़ गयी है

जब मुझसे मिली ‍फ़ि‍राक वो आँख
हर बार इक बात गढ़ गयी है

फ़िराक़ गोरखपुरी

1. उपदेशक
2. कोमल हवा के स्पर्श से
3. दुआ का मन्त्र
4. टेढ़ापन

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