Harivansh Rai Bachchan – Agneepath | हरिवंश राय बच्चन – अग्निपथ | Poetry

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हरिवंश राय बच्चन जी की यह कविता ज़िंदगी के मुश्किल से मुश्किल समय में भी एक प्रेरणा देती रहती है।  इस कविता को उनके बेटे अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ (१९९०) में उपयोग किया गया है जो उस फिल्म की कहानी पर बिलकुल खरी उतरती है।  इसके बाद साल २०१२ में इस फिल्म के रीमेक में भी इस कविता का इस्तेमाल किया गया है।  

Agneepath poem by Harivansh Rai bachchan

 
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
 
तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
 
यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु श्वेत रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
 
 – हरिवंश राय बच्चन


In Roman Script
 
Vraksha Ho Bhale Khade
Ho Ghane Ho Bade,
Ek Patra Chhah Bhi, 
Maang Mat, Maang Mat, Maang Mat
Agneepath Agneepath Agneepath
 
Tu Na Thakega Kabhi,
Tu Na Rukega Kabhi
Tu Na Mudega Kabhi,
Kar Shapath, Kar Shapath, Kar Shapath
Agneepath Agneepath Agneepath
 
Yah Mahaan Drishya Hai,
Chal Raha Manushya Hai,
Ashroo Shawet Rakht Se,
Lathpath Lathpath Lathpath
Agneepath Agneepath Agneepath
 
– Harivansh Rai Bachchan

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