Jagjit Singh Arz-E-Niyaz-E-Ishq Ke Qaabil Nahi Raha Ghazal Lyrics Meaning (English Translation) | Mirza Ghalib | अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
Jagjit Singh’s Arz-E-Niyaz-E-Ishq Ke Qaabil Nahi Raha Ghazal Lyrics in Hindi & English with meaning (Translation). The Ghazal is written by Mirza Ghalib and it’s from the album Ghalib Live In Concert.

मिर्ज़ा ग़ालिब की यह ग़ज़ल उस टूटे हुए इंसान की कहानी है जिसे अपने ही दिल पर कभी नाज़ था। शायर कहता है कि अब वह इश्क़ में अर्ज़ी लगाने के क़ाबिल भी नहीं रहा, क्योंकि जिस दिल पर उसे गर्व था, वह नहीं रहा। वह अपने दिल से कहता है कि मरने का कोई और तरीक़ा खोज, क्योंकि अब क़ातिल के हाथ भी उसके लायक़ नहीं। ज़माने के सितम सहकर भी वह महबूब के ख़याल से कभी ग़ाफ़िल नहीं हुआ। जगजीत सिंह की आवाज़ इस उदासी को गहराई देती है।
| Ghazal | Arz-E-Niyaz-E-Ishq Ke Qaabil Nahi Raha |
| Album | Ghalib Live In Concert |
| Singer | Jagjit Singh |
| Music | Jagjit Singh |
| Lyricist | Mirza Ghalib |
| Actors | NA |
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा ग़ज़ल हिन्दी लिरिक्स
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
जिस दिल प नाज़ था मुझे, वह दिल नहीं रहा
(अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ = प्रेमाकांक्षा की अभिव्यक्ति), (नाज़ = अभिमान, गर्व)
मरने की, ऐ दिल और ही तदबीर कर, कि मैं
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिल नहीं रहा
(तदबीर = उपाय, प्रयत्न, कोशिश), (शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिल = क़ातिल का हाथों और भुजाओं द्वारा क़त्ल किये जाने के योग्य)
गो मैं रहा रहीन-ए-सितमहा-ए-रोज़गार
लेकिन तिरे ख़याल से ग़ाफ़िल नहीं रहा
(गो = यद्यपि, अगरचे), (रहीन-ए-सितमहा-ए-रोज़गार = संसार के ज़ुल्म और अत्याचार का शिकार), (ख़याल = कल्पना, याद), (ग़ाफ़िल = बेसुध, बेख़बर, असावधान)
बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता, मगर ‘असद’
जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वह दिल नहीं रहा
(बेदाद-ए-इश्क़ = प्रेम का ज़ुल्म/ अत्याचार)
इस ग़ज़ल की सबसे ख़ास बात यह है कि “जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वह दिल नहीं रहा” पहले शेर में भी आता है और आख़िरी शेर में भी। इस तरह ग़ज़ल जहाँ से शुरू होती है, वहीं लौटकर ख़त्म होती है, और यह दोहराव दर्द को और गहरा कर देता है। आख़िरी शेर में ग़ालिब अपना तख़ल्लुस “असद” इस्तेमाल करते हैं, जो उनका शुरुआती उपनाम था। यहाँ वे कहते हैं कि इश्क़ के ज़ुल्म से डर नहीं, डर इस बात का है कि उसे सहने वाला दिल ही नहीं बचा। गुलज़ार के धारावाहिक “मिर्ज़ा ग़ालिब” (1988, दूरदर्शन) में नसीरुद्दीन शाह ने ग़ालिब का किरदार निभाया था और उसकी ग़ज़लों को जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने गाया और संगीतबद्ध किया था। इस संगीत को आज भी इस जोड़ी की सबसे बड़ी रचनाओं में गिना जाता है।
Arz-E-Niyaz-E-Ishq Ke Qaabil Nahi Raha Lyrics in English with Meaning (Translation)
Arz-e-Niyaz-e-Ishq Ke Qabil Nahin Raha
Jis Dil Pe Naaz Tha Mujhe, Woh Dil Nahin Raha
(I am no longer fit to offer love’s humble plea;
The heart I once took pride in, that heart is no more.)
Marne Ki, Ae Dil Aur Hi Tadbeer Kar, Ki Main
Shayan-e-Dast-o-Baazu-e-Qaatil Nahin Raha
(Find some other way to die, O heart, for I
No longer deserve the executioner’s strong arm.)
Go Main Raha Raheen-e-Sitamha-e-Rozgar
Lekin Tere Khayal Se Ghaafil Nahin Raha
(Though I stayed hostage to the cruelties of the age,
I was never once heedless of your thought.)
Bedaad-e-Ishq Se Nahin Darta, Magar ‘Asad’
Jis Dil Pe Naaz Tha Mujhe, Woh Dil Nahin Raha
(I do not fear the tyranny of love, but Asad,
The heart I once took pride in, that heart is no more.)
FAQs (Frequently Asked Questions)
Ghalib Live In Concert
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