नवग्रह पूजा विधि (Navgrah Puja Vidhi): सम्पूर्ण विधि, मंत्र, सामग्री और लाभ

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Navgraha Puja Vidhi / नवग्रह पूजा की प्रामाणिक वैदिक-पौराणिक विधि, सामग्री, बीज मंत्र, जप संख्या, हवन और दान की पूरी जानकारी, सरल हिंदी में।

Navgrah-Puja-Vidhi
नवग्रह पूजा विधि (Navgrah Puja Vidhi)

Table of Contents

हिंदू ज्योतिष और सनातन परंपरा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु को नवग्रह (Navagraha / Nine Planets) कहा गया है। माना जाता है कि इन नौ ग्रहों की स्थिति जन्म कुंडली (Janam Kundli / Birth Chart) के अनुसार व्यक्ति के स्वास्थ्य, धन, विवाह, करियर और मानसिक शांति पर प्रभाव डालती है।

जब कुंडली में कोई ग्रह कमजोर, पीड़ित या अशुभ फल दे रहा हो, तब उसकी शांति के लिए नवग्रह शांति पूजा (Navgrah Shanti Puja) की जाती है। गृह प्रवेश, विवाह, नए व्यवसाय के आरंभ और ग्रह दोष निवारण जैसे अवसरों पर भी नवग्रह पूजन कराया जाता है।

भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में नवग्रह पूजा की कई पद्धतियाँ प्रचलित हैं, जैसे:

  • वैदिक-पौराणिक पद्धति: वैदिक/पौराणिक मंत्रों, नवग्रह मंडल की स्थापना, षोडशोपचार पूजन और हवन के साथ।
  • दक्षिण भारतीय (आगम) पद्धति: मंदिरों में नवग्रह सन्निधि की प्रदक्षिणा, तेल-दीपक और अभिषेक पर अधिक जोर।
  • लघु/घरेलू पद्धति: केवल बीज मंत्र जप, ग्रह के वार का व्रत और दान।
  • तांत्रिक पद्धति: यंत्र और विशेष साधना आधारित, जो सामान्य गृहस्थों में कम प्रचलित है।

इन सबकी तुलना करने पर वैदिक-पौराणिक पद्धति देश के अधिकांश पंडितों, पुरोहितों और श्रद्धालुओं में सबसे अधिक मान्य है। इसमें गणेश पूजन से आरंभ, संकल्प, कलश स्थापना, नवग्रह मंडल पूजन, मंत्र जप, हवन, दान और आरती का क्रम होता है। इस लेख में यही विधि दी जा रही है। क्षेत्र और कुल परंपरा के अनुसार छोटे-छोटे भेद हो सकते हैं, इसलिए बड़े अनुष्ठान से पहले अपने कुल पुरोहित से परामर्श अवश्य करें।

  • दिन: शुक्ल पक्ष का कोई शुभ दिन, या जिस ग्रह की शांति करनी हो उसका वार। जैसे सूर्य के लिए रविवार, शनि के लिए शनिवार।
  • नक्षत्र/तिथि: पंचांग देखकर शुभ तिथि और नक्षत्र चुनें। रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) से बचना उचित माना जाता है।
  • समय: प्रातःकाल या सूर्योदय के बाद का पहला भाग श्रेष्ठ है।
  • स्थान: घर का पूजा स्थल, मंदिर या कोई स्वच्छ शांत स्थान।

सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषी से पूछना सर्वोत्तम है।

सामान्य पूजन सामग्री

  • रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (साबुत चावल)
  • पुष्प, फूल माला, दूर्वा, तुलसी दल
  • धूप, दीप, कपूर, घी, रुई की बत्ती
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, मौली (कलावा)
  • गंगाजल, जल का कलश, आम के पत्ते, नारियल
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), फल और मिठाई
  • लाल, सफेद, पीला, हरा और काला कपड़ा (नवग्रह मंडल के लिए)

नवग्रह के अनुसार अनाज (Navgrah Anaj)

ग्रह (Planet)अनाजवस्त्र का रंग
सूर्य (Surya / Sun)गेहूँलाल
चंद्र (Chandra / Moon)चावलसफेद
मंगल (Mangal / Mars)मसूर की दाललाल
बुध (Budh / Mercury)साबुत मूंगहरा
गुरु (Guru / Jupiter)चने की दालपीला
शुक्र (Shukra / Venus)सफेद तिल/चावल या सफेद अनाजसफेद
शनि (Shani / Saturn)काले तिलकाला/नीला
राहु (Rahu)उड़दगहरा नीला/काला
केतु (Ketu)कुलथीचितकबरा/धूसर

चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर नौ खाने (3×3) का मंडल बनाया जाता है। प्रत्येक खाने में उस ग्रह का अनाज रखा जाता है। पारंपरिक दिशा-क्रम इस प्रकार है:

  • मध्य: सूर्य
  • दक्षिण-पूर्व (आग्नेय): चंद्र
  • दक्षिण: मंगल
  • उत्तर-पूर्व (ईशान): बुध
  • उत्तर: गुरु
  • पूर्व: शुक्र
  • पश्चिम: शनि
  • दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य): राहु
  • उत्तर-पश्चिम (वायव्य): केतु

मंडल के पास जल से भरा कलश स्थापित करें, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें।

1. स्नान और संकल्प (Sankalp)

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलकर संकल्प लें कि आप ग्रह दोष की शांति और सुख-समृद्धि के लिए नवग्रह पूजन कर रहे हैं।

2. गणेश पूजन और कलश पूजन

हर शुभ कार्य की तरह सबसे पहले श्री गणेश का पूजन करें। मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः। इसके बाद कलश में वरुण देव का आवाहन कर कलश का पूजन करें।

3. नवग्रह आवाहन और प्रतिष्ठा

प्रत्येक ग्रह का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें और मंडल में अक्षत व पुष्प अर्पित करें। इसके बाद ग्रहों के अधिदेवता और प्रत्यधिदेवता का स्मरण करना भी वैदिक विधि का अंग है, जिसे पुरोहित विस्तार से संपन्न कराते हैं।

4. षोडशोपचार या पंचोपचार पूजन

हर ग्रह को क्रमशः आसन, स्नान (जल/पंचामृत), वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। समय कम हो तो पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) भी मान्य है।

5. नवग्रह मंत्र जप (Navgrah Mantra Jaap)

प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र जपें। नीचे परंपरागत बीज मंत्र और शास्त्रों में बताई गई जप संख्या दी गई है:

ग्रहबीज मंत्रजप संख्या
सूर्यॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः7,000
चंद्रॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः11,000
मंगलॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः10,000
बुधॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः9,000
गुरुॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः19,000
शुक्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः16,000
शनिॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः23,000
राहुॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः18,000
केतुॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः17,000

परंपरा में कलियुग के कारण कई पुरोहित इस संख्या को चार गुना (चतुर्गुण) जपवाते हैं। घर पर स्वयं करने वाले साधक अपनी क्षमता अनुसार 108 बार से आरंभ कर सकते हैं।

6. नवग्रह स्तोत्र पाठ

जप के बाद नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें, जिसका आरंभ “जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्” से होता है। यह स्तोत्र महर्षि व्यास रचित माना जाता है और नवग्रह शांति के लिए अत्यंत लोकप्रिय है।

7. नवग्रह हवन (Navgrah Havan)

वैदिक विधि में हवन का विशेष महत्व है। हर ग्रह के लिए उसकी विशेष समिधा (हवन की लकड़ी) का प्रयोग होता है:

  • सूर्य: आक (मदार)
  • चंद्र: पलाश
  • मंगल: खैर
  • बुध: अपामार्ग (चिड़चिड़ा)
  • गुरु: पीपल
  • शुक्र: गूलर
  • शनि: शमी
  • राहु: दूर्वा
  • केतु: कुश

इन समिधाओं के साथ घी, तिल, जौ और चावल की आहुति दी जाती है। सामान्यतः प्रत्येक ग्रह मंत्र से 108 आहुतियाँ दी जाती हैं।

8. दान (Daan) और दक्षिणा

पूजा के बाद ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान करें, जैसे सूर्य के लिए गेहूँ व गुड़, चंद्र के लिए चावल व दूध, शनि के लिए काले तिल व तेल, गुरु के लिए चने की दाल व पीले वस्त्र। ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा देना भी इस विधि का अंग है।

9. आरती और क्षमा प्रार्थना

अंत में नवग्रह की आरती करें, प्रसाद बाँटें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि नवग्रह पूजा से निम्न लाभ मिलते हैं:

  • कुंडली के ग्रह दोष (Graha Dosh) में शांति
  • शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में राहत की भावना
  • विवाह, संतान और करियर में आ रही बाधाओं के निवारण में सहायता
  • मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा
  • घर और व्यवसाय में सुख-समृद्धि

ध्यान रखें कि ये धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यताएँ हैं। इनके साथ मेहनत, अच्छे कर्म और सही निर्णय भी उतने ही आवश्यक हैं।

  • पूजा के दिन सात्विक भोजन करें और मन, वाणी और कर्म की शुद्धता रखें।
  • मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें। संदेह हो तो पंडित जी से सीखें।
  • बिना कुंडली देखे किसी विशेष ग्रह का रत्न न पहनें।
  • बड़े अनुष्ठान या ग्रह-दोष शांति के लिए योग्य ज्योतिषी और विद्वान पुरोहित की सलाह लें।
  • पूजा श्रद्धा से करें, किसी के डर या भ्रम में आकर महँगे अनुष्ठान न कराएँ।

यदि बड़ा अनुष्ठान संभव न हो, तो यह सरल उपाय अपनाएँ:

  • सुबह स्नान कर गणेश जी का स्मरण करें।
  • नवग्रह मंडल या नवग्रह यंत्र के सामने दीप जलाएँ।
  • प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का 11 या 108 बार जप करें।
  • नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें।
  • ग्रह के वार के अनुसार व्रत या दान करें।
  • किसी नवग्रह मंदिर में जाकर प्रदक्षिणा करें (सामान्यतः नौ परिक्रमा)।
नवग्रह पूजा कितने दिन की होती है?

सामान्य नवग्रह पूजन एक दिन में 2 से 4 घंटे में हो जाता है। जप सहित विस्तृत अनुष्ठान कई दिनों तक चल सकता है।

क्या नवग्रह पूजा घर पर कर सकते हैं?

हाँ, सरल विधि से घर पर की जा सकती है। हवन सहित बड़ी पूजा के लिए पंडित जी को बुलाना बेहतर है।

नवग्रह पूजा कब करानी चाहिए?

गृह प्रवेश, विवाह, नए कार्य के आरंभ, ग्रह दशा या महादशा में कष्ट, और शुभ अवसरों पर कराई जा सकती है।

नवग्रह मंदिर में पूजा करने का तरीका क्या है?

मंदिर में दीप जलाएँ, ग्रहों को उनके रंग के पुष्प या अनाज अर्पित करें, मंत्र जपें और नौ परिक्रमा करें।

नवग्रह पूजा विधि (Navgrah Puja Vidhi) में श्रद्धा, शुद्धता और सही क्रम सबसे महत्वपूर्ण है। वैदिक-पौराणिक पद्धति, जिसमें गणेश पूजन, संकल्प, नवग्रह मंडल स्थापना, मंत्र जप, हवन और दान शामिल हैं, देश भर में सबसे मान्य मानी जाती है। इसे अपने कुल की परंपरा और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार करें। नियमित प्रार्थना, अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच के साथ की गई नवग्रह उपासना जीवन में शांति और संतुलन लाने में सहायक मानी जाती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित सामान्य जानकारी है। व्यक्तिगत समस्याओं के लिए योग्य ज्योतिषी या पुरोहित से परामर्श लें।

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