Vinod Sehgal Bengal Ki Main Shaam-O-Sahar Dekh Raha Hoon Ghazal Lyrics Meaning (English Translation) | Jigar Moradabadi | बंगाल की मैं शाम-ओ-सहर देख रहा हूँ
Vinod Sehgal’s Bengal Ki Main Shaam-O-Sahar Dekh Raha Hoon Ghazal Lyrics in Hindi & English with meaning (Translation). The Ghazal is written by Jigar Moradabadi and it’s from the album Kahkashan (1991).

| Ghazal | Bengal Ki Main Shaam-O-Sahar Dekh Raha Hoon |
| Album | Kahkashan (1991) |
| Singer | Vinod Sehgal |
| Music | Jagjit Singh |
| Lyricist | Jigar Moradabadi |
| Actors | NA |
जिगर मुरादाबादी की यह रचना उनके आम रंग से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसमें इश्क़ नहीं, इंसानियत की चीख़ है। कहा जाता है कि उन्होंने इसे बंगाल के अकाल पर लिखा था। शायर दूर बैठकर भी बंगाल की सुबह-शाम देखता है, जहाँ ग़रीबी के मारे लोग बिना कफ़न-दफ़न सड़कों पर पड़े हैं। इंसान के होते हुए इंसान की यह हालत उससे देखी नहीं जाती, फिर भी वह देखता रहता है। अंत में वह उम्मीद करता है कि रहमत का सूरज निकलने को है। जगजीत सिंह की आवाज़ इस दर्द में गरिमा भर देती है।
बंगाल की मैं शाम-ओ-सहर देख रहा हूँ ग़ज़ल हिन्दी लिरिक्स
बंगाल की मैं शाम-ओ-सहर देख रहा हूँ
हर चंद के हूँ दूर मगर देख रहा हूँ
(शाम-ओ-सहर = शाम और सुबह)
इफ़लास की मारी हुई मख़लूक सर-ए-राह
बेगोर-ओ-क़फ़न ख़ाक बसर देख रहा हूँ
(इफ़लास = दरिद्रता, ग़रीबी), (मख़लूक = सृष्टि के बनाए हुए जीव), (बेगोर-ओ-क़फ़न = बिना कब्र और क़फ़न के)
इन्सान के होते हुए इन्सान का ये हश्र
देखा नहीं जाता है मगर देख रहा हूँ
रहमत का चमकने को है फिर नैयिर-ए-ताबां
होने को है इस शब की सहर देख रहा हूँ
(नैयिर-ए-ताबां = सूर्य का प्रकाश), (शब = रात), (सहर = सुबह, सवेरा)
जिगर मुरादाबादी (1890-1960) को हुस्न और इश्क़ का शायर माना जाता है, इसलिए यह रचना उनकी पहचान से हटकर है। यहाँ वे एक समाज-सजग शायर की तरह सामने आते हैं, और दूर बैठकर भी दूसरों का दर्द महसूस करते हैं। पूरी रचना में “देख रहा हूँ” की टेक एक गवाह की मजबूरी बन जाती है। तीसरे शेर में शायर कहता है कि देखा नहीं जाता, फिर भी देखे बिना रहा नहीं जाता। यही बेबसी इसे इतना असरदार बनाती है। आख़िरी शेर में अँधेरी रात के बाद सुबह की उम्मीद एक झलक की तरह आती है। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जिगर को अपने क्षेत्र का माहिर कारीगर मानते थे। जगजीत सिंह ने अली सरदार जाफ़री के धारावाहिक कहकशाँ (1991-92) में जिगर का कलाम गाया था, जिसमें राज ज़ुत्शी ने जिगर का किरदार निभाया।
Bengal Ki Main Shaam-O-Sahar Dekh Raha Hoon Ghazal Lyrics in English with Meaning (Translation)
Bengal Ki Main Sham-o-Sehar Dekh Raha Hoon
Har Chand Ke Hoon Door Magar Dekh Raha Hoon
(I see the dusk and dawn of Bengal;
Though far away I am, I see it still.)
Iflas Ki Maari Hui Makhlooq Sar-e-Raah
Begor-o-Kafan Khaak Basar Dekh Raha Hoon
(The poverty-stricken multitudes upon the road,
Without grave or shroud, lying in the dust, I see.)
Insaan Ke Hote Hue Insaan Ka Ye Hashr
Dekha Nahin Jata Hai Magar Dekh Raha Hoon
(That man, while man still lives, should meet such a fate:
It cannot be endured, yet I keep on seeing it.)
Rehmat Ka Chamakne Ko Hai Phir Nayyar-e-Taaban
Hone Ko Hai Is Shab Ki Sehar Dekh Raha Hoon
(Mercy’s radiant sun is about to blaze again;
I see the dawn of this long night draw near.)
FAQs (Frequently Asked Questions)
Kahkashan (1991)
You Might Also Like: