Jagjit Singh Bas Ki Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasan Hona Ghazal Lyrics Meaning (English Translation) | Mirza Ghalib | बसकि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
Jagjit Singh’s Bas Ki Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasan Hona Ghazal Lyrics in Hindi & English with meaning (Translation). The Ghazal is written by Mirza Ghalib and it’s from the album Mirza Ghalib (1988).

| Ghazal | Bas Ki Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasan Hona |
| Album | Mirza Ghalib (1988) |
| Singer | Jagjit Singh |
| Music | Jagjit Singh |
| Lyricist | Mirza Ghalib |
| Actors | Naseeruddin Shah |
मिर्ज़ा ग़ालिब की यह ग़ज़ल कम शब्दों में गहरी बात कहती है। पहले शेर में वह कहते हैं कि हर काम का आसान होना कठिन है, और आदमी को इंसान बनना तक नसीब नहीं। दूसरा शेर महबूब की जल्दी पछताने वाली आदत पर चुटकी लेता है, जिसने मेरे क़त्ल के बाद सितम से तौबा कर ली। आख़िरी शेर में वे उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत पर अफ़सोस करते हैं, जिसके नसीब में आशिक़ का गरेबाँ बनना लिखा है। जगजीत सिंह की आवाज़ इसकी गहराई और चुटीलेपन को बख़ूबी निभाती है।
बसकि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना ग़ज़ल हिन्दी लिरिक्स
बसकि दुश्वार है, हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं, इन्साँ होना
(दुश्वार = मुश्किल, कठिन), (मयस्सर = प्राप्त, उपलब्ध )
की मेरे क़त्ल के बा`द, उसने जफ़ा से तौबा
हाए, उस ज़ूद-पशेमाँ का पशेमाँ होना
(जफ़ा = सख्ती, जुल्म, अन्याय, अत्याचार ), (तौबा = गलत काम को भविष्य में न करने की प्रतिज्ञा), (पशेमाँ = लज्जित, शर्मिंदा, जिसे पश्चाताप हुआ हो), (ज़ूद-पशेमाँ = शीघ्र लज्जित हो जाने वाला, अपनी भूल पर बहुत जल्दी पछताने वाला)
हैफ़, उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत, ग़ालिब
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गरीबाँ होना
(हैफ़ = पश्चाताप, अफ़सोस), (गरीबाँ = कुर्ते आदि में गले का भाग, गिरहबान)
इस ग़ज़ल का पहला शेर उर्दू के उन चुनिंदा शेरों में गिना जाता है जो मुहावरे की तरह बोले जाते हैं। इसमें ग़ालिब “आदमी” और “इंसान” के बीच फ़र्क़ करते हैं: आदमी होना जन्म की बात है, पर इंसान बनना उम्र भर की कठिन साधना है। दूसरे शेर में “पशेमाँ” शब्द का खेल देखिए: “ज़ूद-पशेमाँ” (जल्दी पछताने वाला) और फिर “पशेमाँ होना”, यानी मारने के बाद भी महबूब की अदा पर ग़ालिब का चुटीला तंज़। तीसरे शेर का “चार गिरह कपड़ा” कपड़े की एक छोटी नाप का टुकड़ा है, यानी गरेबाँ का छोटा-सा हिस्सा, जो आशिक़ के जुनून में फटने के लिए ही बना है। यह ग़ज़ल दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू पाठ्यक्रम में ग़ालिब की चुनी हुई ग़ज़लों में भी शामिल है।
Bas Ki Dushwaar Hai Har Kaam Ka Aasan Hona Ghazal Lyrics in English with Meaning (Translation)
Baski Dushwar Hai, Har Kaam Ka Aasan Hona
Aadmi Ko Bhi Mayassar Nahin, Insan Hona
(Alas, how hard it is for any task to be easy;
Even to become truly human lies beyond man’s reach.)
Ki Mere Qatl Ke Baad, Usne Jafa Se Tauba
Haye, Us Zood-Pashemaan Ka Pashemaan Hona
(After my murder, she swore off cruelty;
Ah, that swift-repenting one, and her repenting!)
Haif, Us Chaar Girah Kapde Ki Qismat, Ghalib
Jis Ki Qismat Mein Ho Aashiq Ka Garebaan Hona
(Pity, O Ghalib, the fate of that scrap of cloth,
Whose destiny it is to be a lover’s collar.)
FAQs (Frequently Asked Questions)
Mirza Ghalib (1988)
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